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✦ गायत्री मंत्र • Gayatri Mantra ✦

Ganesh Gayatri Mantra

गणेश गायत्री मंत्र
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भगवान गणेश की उपासना के लिए गायत्री छंद में रचित पवित्र मंत्र। यह मंत्र बुद्धि, विद्या और सिद्धि का प्रदाता है।

गणेश गायत्री मंत्र
एकदंताय विद्महे
वक्रतुण्डाय धीमहि।
तन्नो दंती प्रचोदयात्॥

परिचय — About Ganesh Gayatri

गायत्री मंत्र की तर्ज पर रचित यह गणेश गायत्री मंत्र गणेश के "एकदंत" (एक दाँत) और "वक्रतुण्ड" (टेढ़ी सूँड) स्वरूप का ध्यान करता है। इसका नित्य जप सूर्योदय के समय करने से बुद्धि का विकास और मन की एकाग्रता बढ़ती है।

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शब्द-विश्लेषण — Word by Word Meaning
OM
परब्रह्म का प्रतीक, सृष्टि का मूल ध्वनि
एकदंताय EKADANTAYA
एक दाँत वाले — जो एकदंत स्वरूप में प्रकट हैं
विद्महे VIDMAHE
हम जानते हैं / हम ध्यान करते हैं (गायत्री का प्रथम पाद)
वक्रतुण्डाय VAKRATUNDAYA
वक्र (टेढ़ी) तुण्ड (सूँड) वाले — गणेश का प्रमुख स्वरूप
धीमहि DHIMAHI
हम ध्यान करते हैं / हम उपासना करते हैं
तन्नो दंती प्रचोदयात् TANNO DANTI PRACHODAYAT
वे दंत (एकदंत गणेश) हमें प्रेरित करें, हमारी बुद्धि को उद्दीप्त करें
सम्पूर्ण अर्थ — Complete Meaning

मंत्र का हिंदी अर्थ

हम एकदंत (एक दाँत वाले) गणेश को जानते हैं। हम वक्रतुण्ड (टेढ़ी सूँड वाले) का ध्यान करते हैं। वे एकदंत गणेश हमारी बुद्धि को प्रेरित और उद्दीप्त करें।

लाभ — Benefits
🧠
बुद्धि विकास
प्रातःकाल नित्य जप से बुद्धि तीक्ष्ण होती है और स्मरण शक्ति बढ़ती है।
📚
विद्या प्राप्ति
छात्रों के लिए परीक्षा से पूर्व यह मंत्र विशेष फलदायी है।
सिद्धि प्राप्ति
१०८ बार जप से मनोकामना पूर्ण होती है और कार्य सिद्ध होते हैं।
🛡️
विघ्न नाश
किसी भी नए कार्य के आरम्भ में जप से सभी विघ्न दूर होते हैं।
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जप विधि — Chanting Method

जप विधि एवं नियम

अन्य गणेश गायत्री रूप — Variants

गणेश गायत्री के अन्य रूप

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि। तन्नो दंती प्रचोदयात्॥
(पुराण प्रचलित रूप)

ॐ लम्बोदराय विद्महे महोदराय धीमहि। तन्नो दंती प्रचोदयात्॥
(लम्बोदर स्वरूप)

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